म्यूचुअल फंड के फायदे और नुकसान क्या है | Mutual Fund Ke Fayde Or Nuksan ?

म्यूचुअल फंड के फायदे और नुकसान क्या है | Mutual Fund Ke Fayde Or Nuksan ?

म्यूचुअल फंड क्या है – what is mutual fund in hindi :

दोस्तों म्यूचुअल फण्ड दो इंग्लिश सब्दो से मिलकर बना है म्यूचुअल और फण्ड, म्यूचुअल का मतलब होता है आपसी या आपस का और फण्ड का मतलब होता है रुपया, तो म्यूचुअल एक ऐसा फण्ड है इसमें बहुत सारे लोगो के पैसे को जमा करके रखा जाता है इस जमा फण्ड को हम उस म्यूचुअल फण्ड का AUM ( asset under management ) कहते है और फिर जमा किये हुए फण्ड को अच्छी से अच्छी जगह पर इन्वेस्ट किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा return मिल सके, तो यही है म्यूच्यूअल फण्ड |

दोस्तों हर म्यूचुअल फण्ड को मैनेज करने के लिए professional होते है जिन्हें हम फण्ड मेनेजर कहते है म्यूचुअल फण्ड में कलेक्ट किये हुए फण्ड को कंहा इन्वेस्ट करना है और कितना इन्वेस्ट करना है ये सारे डिसीजन फण्ड मेनेजर ही करते है फण्ड मेनेजर इसे अलग अलग जगह इन्वेस्ट करता है |

म्यूचुअल फण्ड काम कैसे करता है – how to work mutual fund :

मानलीजिये की कुछ दोस्त मिलकर जमीन का एक टुकड़ा खरीदते है 100 गज जमीन के टुकड़े की किम्मत 1 लाख रूपए है अब यदि इस फण्ड को 10 रूपए की यूनिट्स में बाँटेगे तो 10 हज़ार यूनिट बनेगी निवेशक जितना चाहे उतने अपनी इन्वेस्टमेंट कैपिसिटी के अनुसार खरीद सकते है यदि आपके पास केवल 1000 रूपए है तो आप 100 यूनिट्स खरीद सकते है उसी propulsion में आप उस जमीन के मालिक बन जाते है

अब मानलीजिये की एक महीने के बाद 1 लाख इन्वेस्टमेंट की किम्मत बढकर 1 लाख 20 हज़ार हो गयी अब इसके अनुसार यूनिट की किम्मत निकाली जाएगी तो 10 रूपए वाला यूनिट अब 12 रूपए का हो चूका है जिस इन्वेस्टर ने 1000 रूपए के 100 यूनिट्स खरीदे थे 12 रूपए पर यूनिट के हिसाब से अब उसकी इन्वेस्टमेंट की वैल्यू 1200 रूपए हो चुकी है ठीक म्यूचुअल फण्ड भी इसी प्रकार काम करते है जहा आप कुछ यूनिट्स को खरीदते है और मार्किट के उत्तार चड़ाव से उसकी वैल्यू कम और ज्यादा होती है जिससे आपको dividend मिलता है.

म्यूचुअल फंड के फायदे और नुकसान क्या है :

दोस्तों अब समझ लेते है म्यूचुअल फण्ड के फायदे क्या है और नुकसान क्या है वैसे तो म्यूचुअल फण्ड के फायदे ज्यादा है आगे आपको बताया गया है –

म्यूचुअल फण्ड के फायदे क्या है – advantage of mutual fund :

  • आप जब किसी म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्ट करते है तो आपके इन्वेस्टमेंट में से कुछ राशी expensive ratio के रूप में काट लिया जाता है यह expensive ratio 1 से 2% तक का होता है जो की बहुत ही कम होता है इस प्रकार बहुत कम खर्चे में आप professional फण्ड मेनेजर की सेवाए प्राप्त कर सकते है
  • म्यूचुअल फण्ड के कम खर्चे का कारण है बहुत सारे लोग मिलकर एक फण्ड में निवेश करते है जिससे उस फण्ड को मैनेज करने का खर्चा सभी व्यक्तियों में विभाजित हो जाता है
  • इसका दूसरा फायदा ये है की कम पूंजी से भी इन्वेस्टमेंट का विकल्प अगर आपको सीधे स्टॉक मार्किट में निवेश करना है तो आपको अधिक पूंजी की आवस्यकता होगी परन्तु आप बहुत कम पैसे से भी म्यूचुअल फण्ड में निवेश कर सकते है
  • म्यूचुअल फण्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है की मात्र 500 या 1000 रूपए में भी SIP की सुरुआत कर सकते है इसमें आपको इन्वेस्ट करने के लिए इंतज़ार नहीं करना होगा की जब आपकी इनकम ज्यादा होगी तब आप इन्वेस्ट करेंगे |
  • systematic investment plan (SIP) में इन्वेस्ट करके अपने गोल को प्राप्त कर सकते है जैसे की कार खरीदना घर खरीदना जमीन खरीदना इत्यादि मार्केट में हजारो स्कीम उपलब्ध है उनमे से आप अपने निवेश और जरूरतों के हिसाब से इन्वेस्ट कर सकते है
  • म्यूचुअल फण्ड में good return और power of compounding देखि जाती है इसे एक उधाहरण की सहायता से समझते है मानलीजिये आपने 5000 रूपए की SIP की है और उसमे rate of return 12% होता है और इन्वेस्टमेंट पीरियड 15 वर्ष है इसमें आपकी maturity होगी 25.2.लाख रूपए वही अगर आप इन्वेस्टमेंट प्लान को 5 वर्ष बढाकर 20 वर्ष कर देते है तो आपकी maturity होगी 50 लाख रूपए तो आपने 5 वर्ष में ही आपका अमाउंट डबल हो गया है इसे कहते है power of compounding |
  • दोस्तों म्यूचुअल फण्ड में अनेक प्रकार की केटेगरी होती है उनमे से आप अपने रिस्क प्रोफाइल के अनुसार बेस्ट स्कीम का चुनाव कर सकते है जैसे की आप हाई रिस्क लेने वाले निवेशक है तो आप small cap fund के साथ जा सकते है वही आप येसे इन्वेस्टर है जिसे रिस्क लेना पसंद नहीं है वो blue-chip फण्ड और debts फण्ड का चुनाव कर सकता है |
  • म्यूचुअल फण्ड का एक और बड़ा फायदा ये है की आपका पैसा अलग अलग सेक्टर में इन्वेस्ट रहता है जिससे आपके निवेश में विविधता (diversified) बनी रहती है मानलो किसी सेक्टर में मंदी आ गयी है तो आपके पोर्ट फोलियो पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योकि आपका इन्वेस्टमेंट पहले से ही diversified है |
  • म्यूचुअल फण्ड में निवेश करना बहुत ही आसान है आप म्यूचुअल में निवेश करने के लिए डायरेक्ट AMC Website यूज़ कर सकते है किसी ब्रोकर या एजेंट का सहारा ले सकते है या फिर मोबाइल एप्प का यूज़ कर सकते है जैसे की groww app, paytm app, zerodha app इत्यादि आप इसमें म्यूचुअल फण्ड को compare कर सकते है और बाद में अपना पोर्ट फोलियो track भी कर सकते है आज कल ऑनलाइन होने के कारण यह बहुत ही आसान हो गया है |
  • दोस्तों अगर आप स्टॉक मार्केट में निवेश करते है तो उसमे आपको समय देना होता है परन्तु म्यूचुअल फण्ड में ऐसा नहीं है अगर आप 6 महीने या 1 साल के बाद पोर्ट फोलियो को रिव्यु करेंगे तब भी आपका काम चल जायेगा |
  • दोस्तों कई बार ऐसा होता है की हम इन्वेस्ट तो कर देते है परन्तु कुछ कारणवस् हमे पैसे की आवस्यकता होती है और निवेश का पैसा निकालने की आवस्यकता पड़ जाती है लेकिन कई इन्वेस्टमेंट प्लान में lock-in-period होता है जिस वजह से हम अपना पैसा वापिस नहीं निकाल पाते परन्तु म्यूचुअल फण्ड में येसा नहीं होता है जिस दिन आप redemption request डालेंगे उससे 2 से 4 दिन में पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है |

म्यूचुअल फंड के नुकसान क्या है – disadvantage of mutual fund :

  • दोस्तों आपने अक्सर सुना होगा की mutual fund are subject to market risk दरअसल फण्ड मेनेजर आपका पैसा शेयर्स में लगाते है जिसमे काफी ज्यादा उतार चड़ाव होती है इसलिए म्यूचुअल फण्ड unstable रहता है हलाकि ये बता दे की रिस्क और रिवार्ड रिलेटेड है |
  • कुछ फण्ड को मैनेज करने की कास्ट काफी ज्यादा है कंपनी आपके फण्ड को मैनेज करने के लिए चार्ज करती है जिसमे फण्ड मेनेजर की सैलरी और दुसरे खर्चे मिले होते है
  • यदि आप तय समय से पहले अपने म्यूचुअल फण्ड से बाहर निकलते है तो एग्जिट लोन के रूप में कुछ चार्ज भी देना होता है तो आप एग्जिट लोन भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले पता कर लेना चाहिए |
  • कुछ म्यूचुअल फण्ड स्कीम में आप 5 से 8 साल का लॉक इन ( lock in period ) फॉलो करना होगा येसा ना करने पर पेनाल्टी आप पर लग सकती है |
  • फण्ड मेनेजर आपके पैसे को अलग अलग जगह पर इन्वेस्टमेंट करते है जिससे डायवर्सन कहा जाता है इससे आपका रिस्क कम होता ही है लेकिन होने वाला प्रॉफिट भी कम हो जाता है
  • कई सारे स्कीम भी होती है जैसे इक्विटी स्कीम, हाइब्रिड स्कीम, डिबेंचर स्कीम, टैक्स सेविंग स्कीम जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए और जिसके हिसाब से आप अपना इन्वेस्टमेंट प्लान करेंगे |

निष्कर्स – conclusion :

दोस्तों म्यूचुअल फण्ड में निवेश करने से पहले आपको थोड़ी रिसर्च कर लेना चाहिए उसके बाद निवेश करना चाहिए, सुरुआत में म्यूचुअल फण्ड से ही इन्वेस्ट करना चाहिए क्योकि इसमें रिस्क कम होता है लेकिन जैसे ही आपकी नालेज और इन्वेस्टमेंट बड जाती है आप स्टॉक में भी निवेश कर सकते है लेकिन इसमें रिस्क फेक्टर ज्यादा रहता है |

दोस्तों हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी आपको कैसी लगी आप निचे कमेंट में बता सकते है और शेयर मार्केट से सम्बंधित सभी जानकारी के लिए आप हमारे साईट पर विजिट कर सकते है धन्यवाद् |

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